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धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

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नई दिल्ली। समलैंगिता के मुद्दे पर आज देश की सर्वोच्च अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में सुनाये गए अपने ही फैसले को बदलते हुए आईपीसी की धारा 377 को खत्म कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई ने अपने फैसले को पढ़ते हुए बोला की कि समाज को पूर्वाग्रहों से मुक्त होना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि हर बादल में इंद्रधनुष खोजना चाहिए। बता दें कि इंद्रधनुषी झंडा एलजीबीटी समुदाय का प्रतीक है। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी धारा 377 को मनमाना बताया।

आपको बता दें कि भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा-377 के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति अप्राकृतिक रूप से यौन संबंध बनाता है तो उसे उम्रक़ैद या जुर्माने के साथ दस साल तक की कैद हो सकती है। आइपीसी की ये धारा लगभग 150 साल पुरानी है। इसी व्यवस्था के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में परस्पर सहमति से दो वयस्कों के बीच समलैंगिक यौन रिश्तों को अपराध की श्रेणी में रखने वाली धारा 377 को गैरकानूनी और असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है और सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया की सबको समानता से जीने का अधिकार कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को मंजूरी दे दी है।

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